


Jai Shivay hari Seva Nyas & Jyotish Kendra
||Jai Shivay Hari ||
||जय शिवाय हरि नमस्तुभ्यम||
"निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा।"
84 लाख योनियों के बाद यहाँ मानव योनि प्राप्त होती है। मानव जीवन वह है जिसमें सभी ज्ञान, शक्ति, भोग, उपभोग, सुख, दुख, जरा, व्याधि, पाप, पुण्य, अच्छा बुरा का ज्ञान है।
इस शरीर में ही मुख्य दो इन्द्रियाँ हैं:
ज्ञानेंद्रियाँ: आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा
कर्मेंद्रियाँ: हाथ, पैर, मुँह, गुदा और लिंग
श्रीमद्भागवद् गीता में मन को मिलाकर 16 इन्द्रियों का वर्णन है। वर्ष में 12 माह, माह में 4 सप्ताह, सप्ताह में 7 दिन होते हैं।
कुंडली में भी 27 नक्षत्र, 12 राशियाँ, 12 राशियों के 7 स्वामी यानी 7 ग्रह और 2 उपग्रह = 9 ग्रह, 7 दिन और 7 ग्रह - रवि (सूर्य), चन्द्र (चन्द्रमा), मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र और शनि।
इन सात ग्रहों में भी 3 पुरुष ग्रह - मंगल, गुरु, सूर्य और 4 स्त्री ग्रह - शुक्र, शनि, चन्द्र और बुध होते हैं।
इन ग्रहों के अनुसार मानव का शरीर निर्मित होता है। इन सात ग्रहों के अपने रंग होते हैं और वे मानव शरीर में पाए जाते हैं।
आप अभी सोच रहे होंगे कि हम 7 ग्रहों की बात कर रहे हैं जबकि ग्रह 9 हैं। जी हां, आप बिलकुल सही सोच रहे हैं, 2 ग्रह का अपना स्थान या राशि नहीं है, वे हैं राहु और केतु।
इन 9 ग्रहों की आयु होती है 120 वर्ष:
सूर्य 6 वर्ष, चन्द्र 10 वर्ष, मंगल 7 वर्ष, राहु 18 वर्ष, गुरु 16 वर्ष, शनि 19 वर्ष, बुध 17 वर्ष, केतु 7 वर्ष और शुक्र 20 वर्ष। अर्थात, कलियुग में मानव की आयु भी 120 वर्ष की मानी गई है।
इन 9 ग्रहों की 8 माताएँ होती हैं:
मंगला 01 वर्ष, पिंगला 02 वर्ष, धन्या 03 वर्ष, भ्रामरी 04 वर्ष, भद्रिका 05 वर्ष, अलका 06 वर्ष, सिद्धा 07 वर्ष, संकट 08 वर्ष यानी कुल 36 वर्ष जिन्हें योगिनी कहा जाता है। ग्रह की महादशा और योगिनी की दशा को योगिनी दशा कहा जाता है। हमारे जीवन में इस दशा का अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ता है।
वर्तमान कुंडली के 12 भावों में पड़े 9 ग्रह हमारे पूर्व प्रभव के कारण होते हैं। 12 भाव मानव जीवन के 12 मुख्य संबंधों को प्रदर्शित करते हैं। 12 भाव मुख्य रूप से नौकरी, करियर, प्रेम, विवाह, भूमि, भवन, रोग, शत्रु, भोग, राजनीति, विदेश गमन, शिक्षा, अध्यात्म आदि को दर्शाते हैं।
कुंडली का विश्लेषण कराकर कुंडली में ग्रह का पुरुषार्थ के द्वारा शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है।
पुरुषार्थ होता है कुंडली में पड़े विभिन्न अशुभ ग्रह की शांति। पूजा, पाठ, जाप, दान, यज्ञ, नक्षत्र धारण या उपाय - गो सेवा, माता-पिता सेवा, गुरु सेवा, विप्र सेवा, संत सेवा या अपनी जीवन शैली में परिवर्तन। कठिन समस्याओं का निवारण 10 महाविद्या पाठ, भगवान दत्तात्रेय सवर मंत्र, बीज मंत्र के पाठ से पितृ दोष, सर्प दोष, विष दोष, मांगलिक दोष, गुरु चांडाल दोष, केमद्रुम दोष, त्रिकाल दोष, केंची दोष का सरल उपाय द्वारा समाधान होता है।
यहाँ हम आपकी सभी ज्योतिष और वास्तु संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए उपलब्ध हैं। हमारे अनुभवी ज्योतिषगण आपकी समस्याओं को समझते हैं और आपको सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आप यहाँ समृद्धि, सुख, और संतुलन का मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।जैसे की कुंडली विश्लेषण, वर्षफल, कर्मकांड, वास्तुदोष निवारण, श्रीमद भागवत कथा, राम कथा, शिव पुराण कथा, संगीतमय सुंदरकांड, और श्री रामायण पाठ।
एक वेदिक ज्योतिषी और गुरु , जिनके पास ज्योतिष और अध्यात्मिक क्षेत्र में काम करने की गहन समझ है, जिनमें 28 साल का ज्ञान और कौशल शामिल है। अष्टकवर्ग और मुहूर्त के मास्टर , साथ ही वास्तु शास्त्र और चेहरे की पढ़ाई जैसे कुछ प्रसिद्ध गुप्त विद्याओं में भी विशेषज्ञ हैं।
सलाह और अन्य सेवाओं के लिए कृपया "हमारी सेवाएं" अनुभाग पर जाएं।


संक्षिप्त परिचय
स्वामी श्री दुर्गाराम चरण दास गिरी जी महाराज
।। भगवत्या कृतं सर्वं न किंचिदवशिष्यते।।
। सर्वरुपमयी देवी सर्वं देवीमयं जगत् ।
।अतोऽहं विश्वरुपां तां नमामि परमेश्वरीम् ।।
जन्म स्थली :- टिहरी गढ़वाल जनपद के गौड़ ब्राह्रमण के घर पर आषाढ़ शुक्ल एकादशी को, शक्ति यंत्र पर स्थित ऋषियों की तपोस्थली श्री हृषीकेश नारायण ( श्री भरत भगवान )की तीर्थ स्थली, श्री पातलेश्वर व मॉ भद्रकाली की गोद में बालक का जन्म हुआ।
पिताश्री का परिचय :- सद्गुरु महाराज स्व. श्री रामलाल शिव चरण शास्त्री मूल स्थान संगम की तीर्थ स्थली देवप्रयाग के निवासी है।वैष्णव सम्प्रदाय के शक्ति उपासक,दो विषय के व्याकरणाचार्य, अनेक स्थानों में संस्कृत महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद पर कार्य व बद्रीनाथ धाम के पुरोहित भी
सामान्य शिक्षा :-सामान्य शिक्षा दीक्षा ऑग्लभाषा में व पिताजी की देखरेख में शास्त्री व आचार्य के साथ ही कर्मकाण्ड मे दीक्षित हुये ।जिनको ये पिता के साथ सद्गुरु भी मानते है।
बाल्यावस्था :- बाल्यावस्था से ही स्वामी जी सनातन धर्म से ओतप्रोत,जिज्ञासु प्रवृत्ति के, प्रभू कथा प्रेमी,प्रकृति प्रेमी,विलक्षण बुद्धि के रहे ।
विशेष रुचि:- बालावस्था से ही इन्हें वेद,शास्त्र पुराण, आध्यात्मिक,राजनीतिक,पुस्तक पढ़ना, शक्ति के गूढ़ से गूढ़ रहस्यों व ज्योतिष, अंक ज्योतिषी के बारे मे जानने की
आध्यात्म दीक्षा :-स्वामी जी गिरि सम्प्रदाय से दीक्षित है। जिज्ञासु प्रवृति के भाववश पुरी,व नाथ सम्प्रदाय से भी जुड़े है। वैष्णव सम्प्रदाय पिताश्री की धरोहर ।
आध्यात्म नाम:-2012 मे एक रात स्वप्न में देवप्रयाग केशिवशक्ति पीठ पर इन्हें शक्ति ने दर्शन देकर इनको दुर्गा राम चरण के नाम से पुकारा । इन्होंने इसे मॉ का आशीर्वाद मान अक्षय तृतीय के दिन विधि विधान से दुर्गाराम चरण दास गिरी से समाज की सेवा मे लग गये ।
कुलदेवता :- श्री नागराजा नृसिंह भगवान
कुलदेवी :- मॉ ज्वालपा
इष्ट देव :-श्रीशिवशक्ति
उपासक:-त्रैशक्ति
आपत वचन :- जय शिवाय हरि, जयशक्ति शिवाय हरि।।
ध्येय वाक्य:- सकारात्मक बने रहो,आध्यात्म से जुड़े रहो, कर्म करते रहो ,कल्याण अवश्य होगा।।
आध्यात्मिक/सामाजिक दायित्व:-“जय शिवाय हरि सेवा न्यास” के परमाध्यक्ष,
षड्दर्शन साधू समाज अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षा समिति के राष्ट्रीय सदस्य, साथ ही श्रीशिवशकित की प्रेरणा कृपा से स्वयं का पिण्डदान कर 9 अप्रैल 21 मे सन्यास दीक्षा ली, सन्यास दीक्षा के बाद परिचय हुवा स्वामी दुर्गाराम चरणदास पुरी (स्वामी दुर्गा पुरी)
आध्यात्मिक यज्ञ:- पुरश्चरण सहित सवा लाख गायत्री,(पंचरत्न कमलगट्टे)से “श्री”का व मृतसंजीवनी का यज्ञ सत् चण्डी महायज्ञ, श्रीदुर्गासप्तसती के बीजमंत्र,श्रीरामचरित्र मानस की चौपाई से यज्ञ श्रीहरि के मंत्र तुलसी की काष्ठ व श्रीशिवशक्ति का बेल,बेलपत्री से आहूति
आध्यात्मिक शोध:- 2010 श्रीदुर्गासप्तशती के बीजमंत्र,सिद्धकुंजिका स्त्रोत के मंत्र व साबर मंत्र को सूर्य,चन्द्र ग्रहण,सूर्यसंक्रान्तियो मे 5 वर्षों तक यज्ञ,जप द्वारा सिद्ध किया ।
प्रकाशन :- 2015 मे त्रैमासिक पत्रिका “ द् अनहद नाद व 2018 में श्रीदु्गासप्तशती त्रैशक्ति बीजमन्त्रात्मक साधना का
सामाजिक कार्य :- स्वामी श्री गौ सेवा, पक्षी सेवा,नर सेवा रोगी सेवा को ही नारायण सेवा मानते हैं। निर्धन कन्या विवाह और निर्धन बालिका शिक्षा के क्षेत्र में इनका योगदान अतुलनीय है।
राष्ट प्रेम भक्ति:-समय-समय पर राष्ट्र पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के समय राष्ट्रहित में बढचढ कर सहभागिता करते है ।इस महामारी के समय विश्व कल्याण हेतु लौंग,इलायची,काली मिर्च,लाल मिर्च,बेल अनार दाने आदि से यज्ञ, व प्रतिदिन मंत्र जाप
संकल्प:- घर-घर में मॉ तुलसी व रामचरित्र मानस कापूजन, त्रैशक्तिपीठ, गोधन पीठ की स्थापना ।

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